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सोमवार, 16 फ़रवरी 2026
भारत में आमजन की सूचना के प्रति जागरूकता बढ़ी, अमेरिका में पाठकों के सामने न्यू मीडिया का विकल्प- न्यूयार्क टाइम्स के पत्रकार श्री बजाज
( India Ai Impact Summit 16 से 20 फरवरी पर विशेष )
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"एआई महाशक्ति है" "मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड" के साथ,एआई का लोकतंत्रीकरण करना होगा, Global South में होने जा रहे india AI इम्पैक्ट समिट, लोग, ग्रह और प्रगति को समर्पित "
"भारत दुनिया का स्वागत करने के लिए उत्सुक है।हमने सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय या सभी के लिए कल्याण, सभी के लिए खुशी की थीम चुनी है- प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी "
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( सरमन नगेले )
"Artificial Intelligence (AI) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंसानी सभ्यता को पूरी तरह से बदलने की दहलीज़ पर खड़ा है, और हम जो हासिल कर सकते हैं उसकी सीमाओं को आगे बढ़ा रहा है। यह टेक्नोलॉजिकल क्रांति इंसानी कोशिशों के हर क्षेत्र में तरक्की के लिए पहले कभी नहीं देखे गए मौके खोलती है, साथ ही तेज़ी से जटिल और बदलते जियोपॉलिटिकल सिस्टम में समाज की बुनियाद को भी गहरी चुनौती देती है। विकासशील देशों के लिए, एआई पारंपरिक विकास के रास्तों से आगे निकलने का एक पहले कभी नहीं देखा गया मौका देता है। AI की मल्टी-मॉडल और मल्टी-लिंगुअल क्षमताएं नई संभावनाएं बनाती हैं जिनके ज़रिए बड़े पैमाने पर फ़ायदों तक पहुंच बनाई जा सकती है। नतीजतन, AI को सिर्फ़ एक टेक्नोलॉजिकल तरक्की के तौर पर नहीं देखा जाता, बल्कि सबको साथ लेकर चलने वाले विकास को मुमकिन बनाने और उन मौकों तक पहुंच बढ़ाने के लिए एक स्ट्रेटेजिक टूल के तौर पर देखा जाता है जो पहले आबादी के बड़े हिस्से की पहुंच से बाहर रहे हैं।"
इसी बीच भारत सरकार और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस तरह के मिशन का ताना बाना बुन रहे हैं की AI के क्षेत्र में मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड" के साथ एआई का लोकतंत्रीकरण हो और सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय या सभी के लिए कल्याण, सभी के लिए खुशी ला सके।
इसी उद्देश्य के चलते भारत तैयार है ग्लोबल साउथ में होने जा रहे पहले ग्लोबल एआई समिट की मेजबानी करने के लिए। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में शामिल होने के लिए दुनियाभर से दिग्गज नई दिल्ली पहुंचने वाले हैं। गूगल, ओपनएआई, एनवीडिया जैसी बड़ी कंपनियों के सीईओ के साथ-साथ 15 से 20 देशों की सरकारों के प्रमुख, 50 से ज्यादा विदेशी मंत्री और 40 से ज्यादा भारतीय और ग्लोबल सीईओ की मौजूदगी होने वाली है। इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में अब तक 35,000+ रजिस्ट्रेशन; 100+ देश, 500+ स्टार्टअप 500 सेशन में शामिल होंगे।
India Ai Impact Summit की शुरुआत नई दिल्ली में 16 फरवरी से होने जा रही है जो 20 फरवरी तक चलेगा। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन होगा। वह 19 फरवरी को मुख्य प्लेनरी को संबोधित करेंगे। मुख्य आयोजन 16 फरवरी से ही शुरू हो जाएगा।
समिट में प्रमुख सीईओ के पहुंचने के विशेष कारण हैं। इनमें भारत की एआई वर्कफोर्स, डेटा की खपत और भारतीय आबादी शामिल है, जो एआई कंपनियों के लिए भारत एकदम सही देश है। भारत की बड़ी आबादी आज इंटरनेट से जुड़ी है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करने में बिलकुल भी पीछे नहीं है। दुनिया में डेटा की जो खपत है, उसका करीब 20 फीसदी भारत जनरेट करता है। यही इंडिया की बड़ी ताकत में शामिल है।
जिस तरह भारत ने आईटी के क्षेत्र में अपना लोहा मनवाया और दुनिया की दिग्गज कंपनियों को सर्विस सपोर्ट दिया। कुछ वैसा ही अब एआई के क्षेत्र में हो सकता है और इसलिए दुनिया भारत को मुख्य देश के तौर पर देख रही है।तमाम रिपोर्टों में यह सामने आया है कि अमेरिका और चीन के बाद भारत में एआई के क्षेत्र में सबसे ज्यादा काम हो रहा है। यही वजह है कि दुनिया, भारत को गंभीरता से देख रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई को लेकर अपने विचार साझा करते हुए कहा है की आज के लोग अपनी पीढ़ी के विशाल तकनीकी अवसरों का बुद्धिमानी से उपयोग करें, विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का, इसे प्रयासों को प्रतिस्थापित करने के बजाय क्षमताओं को बढ़ाने का एक शक्तिशाली उपकरण है ।प्रधानमंत्री ने जीवन कौशल और भविष्य की तैयारी के बीच एआई के नैतिक और उत्पादक उपयोग पर भी जोर दिया।
पूर्व के युगों में अनुपलब्ध प्रौद्योगिकी तक युवाओं की पहुंच को लेकर प्रधानमंत्री मोदी का मानना है की , "वर्तमान युग के लोग भाग्यशाली हैं कि सभी को समान रूप से इतने सारे तकनीकी अवसर प्राप्त हुए हैं जो मेरे यानि प्रधानमंत्री के युवा अवस्था के समय में उपलब्ध नहीं थे। ai का सभी को सही उपयोग करने के लिए विवेक और बुद्धि विकसित करने की आवश्यकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता ऐसी चीज होनी चाहिए जो आपकी क्षमताओं को बढ़ाए।"
प्रधानमंत्री के एआई के संबंध में सुझाव :-
"एआई का उपयोग कैसे करें? एक तरीका यह है कि एआई से किसी जीवनी का सारांश तैयार करने को कहें, जो मुझे 10 बुलेट पॉइंट्स में मुख्य बिंदु दे दे, और मुझे ऐसा महसूस हो सकता है कि मैंने बहुत ज्ञान प्राप्त कर लिया है।" "एक और तरीका यह है कि आप पूछें, 'मुझे इन विषयों में रुचि है, और मेरी उम्र इतनी है। क्या आप मुझे पढ़ने के लिए 10 अच्छी जीवनियाँ सुझा सकते हैं?' फिर एआई आपके लिए 10 जीवनियाँ खोजकर दिखाएगा।"
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सतही उपयोग से केवल सतही लाभ ही मिलते हैं, जबकि विचारपूर्वक उपयोग से गहरी समझ और व्यक्तिगत विकास होता है। "एआई एक उपकरण है, कुछ हद तक मददगार है, और हम इसका उपयोग आगे बढ़ने के लिए कर सकते हैं, लेकिन यह हमें सीधे हमारे लक्ष्य तक नहीं पहुंचा सकता।
एआई को सीखने, रचनात्मकता और नवाचार के लिए एक सहायक के रूप में प्रस्तुत करने को लेकर कहा है की इस पर अत्यधिक निर्भरता से बचने के लिए विवेक विकसित करें।
प्रधानमंत्री की भारतीय एआई स्टार्टअप्स से अपेक्षा:- एआई स्टार्ट-अप्स को खरा उतरना की चुनौती।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी मंशा जाहिर करते हुए कहा की स्टार्टअप्स और एआई उद्यमी भारत के भविष्य के सह-निर्माता हैं और कहा कि देश में नवाचार और बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन, दोनों की अपार क्षमता है। उन्होंने आगे कहा कि भारत को दुनिया के सामने एक ऐसा अनूठा एआई मॉडल प्रस्तुत करना चाहिए, जो "मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड" की भावना को दर्शाता हो। भारत पर दुनिया का विश्वास ही देश की सबसे बड़ी ताकत है।भारतीय एआई मॉडल नैतिक, निष्पक्ष, पारदर्शी और डेटा गोपनीयता सिद्धांतों पर आधारित हों। भारतीय स्टार्टअप्स को वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनने की दिशा में भी काम करना चाहिए जो विश्व स्तर पर किफायती एआई, समावेशी एआई और मितव्ययी नवाचार को बढ़ावा दे सकता है। भारतीय एआई मॉडल अलग होने चाहिए तथा स्थानीय एवं स्वदेशी सामग्री और क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देना चाहिए।
स्टार्टअप्स ने एआई क्षेत्र की तीव्र वृद्धि और विशाल भविष्य की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि एआई नवाचार और तैनाती का केंद्र भारत की ओर स्थानांतरित हो रहा है। स्टार्टअप्स ने एआई इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने के लिए भारत की मजबूत प्रतिबद्धता की सराहना की। स्टार्टअप्स और एआई उद्यमी भारत के भविष्य के सह-निर्माता हैं। भारतीय एआई मॉडल स्थानीय एवं स्वदेशी सामग्री तथा क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा दें। प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि भारतीय एआई मॉडल नैतिक, निष्पक्ष, पारदर्शी तथा डेटा गोपनीयता के सिद्धांतों पर आधारित हों। प्रधानमंत्री ने भारतीय एआई मॉडलों की सफलता के लिए पूर्ण सरकारी सहयोग का आश्वासन दिया।
जो देश AI रेवोलुशन में जितना आगे होगा, उसके पास उतना ही एडवांटेज होगा। भारत के लिए ये काम हमारे स्टार्टअप्स को करना है।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के लिए फाउंडेशन मॉडल पिलर के तहत चयनित 12 भारतीय एआई स्टार्ट-अप्स ने अपने विचार और कार्य प्रस्तुत किए।
ये स्टार्टअप्स स्वास्थ्य सेवा, बहुभाषी एलएलएम, सामग्री अनुसंधान, डेटा एनालिटिक्स, इंजीनियरिंग सिमुलेशन सहित विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
जिनमें प्रमुख हैं भारतीय भाषा फाउंडेशन मॉडल, बहुभाषी एलएलएम, स्पीच-टू-टेक्स्ट, टेक्स्ट-टू-ऑडियो और टेक्स्ट-टू-वीडियो; ई-कॉमर्स, मार्केटिंग और वैयक्तिकृत सामग्री निर्माण के लिए जनरेटिव एआई का उपयोग करके 3डी सामग्री; इंजीनियरिंग सिमुलेशन, सामग्री अनुसंधान और विभिन्न उद्योगों में डेटा-संचालित निर्णय लेने के लिए उन्नत एनालिटिक्स; स्वास्थ्य देखभाल निदान और चिकित्सा अनुसंधान आदि ।
अवतार, भारतजेन, फ्रैक्टल, जीएएन, जीईएनएलओओपी, जीएनएएनआई, इंटेलीहेल्थ, सर्वम, शोध एआई, सॉकेट एआई, टेक महिंद्रा और जेडईएनटीईआईक्यू सहित भारतीय एआई स्टार्टअप्स के सीईओ, प्रमुखों और प्रतिनिधियों ने इस बैठक भाग लिया था ।
भारत सरकार और जानकारों का मत है की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का लोकतंत्रीकरण सुनिश्चित करना और एआई के क्षेत्र में उभर रहे अंतर को खत्म करना है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय में एक प्रमुख चिंता यह रही है कि एआई कुछ सीमित भौगोलिक क्षेत्रों में केंद्रित हो सकता है और कुछ ही कंपनियों द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है। इस समस्या से निपटने के लिए, एआई को एक व्यापक, समतावादी तकनीक के रूप में उपलब्ध कराया जाना चाहिए, जो समग्र रूप से मानवता के विकास में सहायक हो। इसका अर्थ है कि विश्व भर के देशों को एआई के सभी अहम तत्वों, जैसे कंप्यूटिंग, मॉडल और डेटा तक पहुंच सुनिश्चित होनी चाहिए। व्यापक पहुंच से उन देशों, समाजों और समुदायों के अनुरूप एआई समाधानों का विकास मुमकिन हो पाएगा। ऐसे संदर्भ-विशिष्ट समाधानों को फिर अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों में लागू किया जा सकता है, जिनमें स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शासन, शिक्षा, विनिर्माण और अन्य शामिल हैं, जिससे उत्पादकता और दक्षता में वृद्धि व्यापक स्तर पर हो सकेगी।”
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026, तीन सिद्धांतों पर आधारित है: लोग, ग्रह और प्रगति, जो यह परिभाषित करते हैं कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मानवता की सेवा कैसे करनी चाहिए, पर्यावरण की रक्षा कैसे करनी चाहिए और समावेशी आर्थिक और सामाजिक विकास को किस तरह बढ़ावा देना चाहिए। इन सिद्धांतों को सात विषयगत चक्रों या कार्य समूहों के ज़रिए क्रियान्वित किया जाता है, जो शिखर सम्मेलन की चर्चाओं और परिणामों को संरचना देते हैं।
मानव पूंजी चक्र का मकसद एआई-संचालित भविष्य के लिए ज़रुरी कौशल और साक्षरता से लोगों को तैयार करना है, जिसमें कौशल विकास और समावेशी कार्यबल परिवर्तन पर जोर दिया गया है। सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समावेशन एआई प्रणालियों में भाषाई, सांस्कृतिक और प्रासंगिक प्रतिनिधित्व को संबोधित करता है, ताकि यह देखा जा सके कि वे डिजाइन में समावेशी और स्थानीय रूप से प्रासंगिक हों। सुरक्षित और विश्वसनीय एआई चक्र पारदर्शी, जवाबदेह और प्रौद्योगिकी-सक्षम शासन ढांचे को बढ़ावा देता है जिसे सभी क्षेत्रों में अपनाया जा सकता है। मज़बूत, नवाचार और दक्षता की मदद से सीमित संसाधनों वाले वातावरण के लिए उपयुक्त किफायती, ऊर्जा-कुशल और टिकाऊ एआई समाधानों को प्राथमिकता मिलती है। विज्ञान चक्र का मकसद समावेशी एआई अनुसंधान व्यवस्था तंत्र और वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग का विस्तार करना है,खास तौर पर वैश्विक दक्षिण में। एआई संसाधनों का लोकतंत्रीकरण डेटासेट, कंप्यूटिंग और मूलभूत मॉडलों तक समान पहुंच पर केंद्रित है, जबकि आर्थिक विकास और सामाजिक भलाई के लिए एआई का मकसद स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में सिद्ध एआई अनुप्रयोगों का विस्तार करना है।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट की रणनीतिक तैयारी के तहत, विविध दृष्टिकोणों को शामिल करने और शिखर सम्मेलन से पहले रफ्तार देने के लिए करीब 300 पूर्व-शिखर सम्मेलन आयोजित किए गए, जिनमें से 57 पूर्व-शिखर सम्मेलन 25 से अधिक देशों में आयोजित किए जा चुके हैं। इसके अलावा, क्षेत्रीय एआई इम्पैक्ट सम्मेलनों की भी एक श्रृंखला आयोजित की ताकि यह देखा जा सके कि भारत का एआई रोडमैप समावेशी हो और विकसित भारत की आकांक्षाओं से जुड़ा हो।
इंडिया एआई इम्पैक्ट सम्मेलन प्रमुख वैश्विक पहलों पर आधारित है, जिनका मकसद एआई को लगातार रफ्तार देना और लोगों, ग्रह और प्रगति के क्षेत्र में इसके वास्तविक प्रभाव को प्रदर्शित करना है। इनमें तीन बड़े वैश्विक चुनौतियाँ शामिल हैं, युवा एआई, एआई बाय हर और एआई फॉर ऑल, जिन्होंने मिलकर 135 देशों से 15,000 से अधिक पंजीकरण और करीब 4,700 प्रस्तुतियाँ हासिल की हैं, जिनमें ग्लोबल साउथ की मजबूत भागीदारी रही है।
अन्य प्रमुख आयोजनों में इंडिया एआई टिंकरप्रेन्योर चैलेंज शामिल है, जिसमें स्कूली छात्रों (कक्षा 6 से 12) की शीर्ष 50 परियोजनाओं का प्रदर्शन किया जाएगा, उड़ान, एक वैश्विक एआई पिच फेस्ट जो उच्च क्षमता वाले स्टार्टअप्स को निवेशकों और नीति निर्माताओं से जोड़ता है, स्वास्थ्य, ऊर्जा, लिंग, कृषि, शिक्षा और दिव्यांगता में एआई पर छह अंतर्राष्ट्रीय संकलन, जो उच्च प्रभाव वाले सार्वजनिक हित के उपयोग के मामलों को प्रदर्शित करते हैं, भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट एक्सपो, जो वैश्विक, राज्य, उद्यम और स्टार्टअप नवाचारों को प्रदर्शित करता है और एक अनुसंधान संगोष्ठी, जिसमें अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के अग्रणी एआई अनुसंधान को प्रदर्शित करने की कढ़ी का प्रमुख हिस्सा माना जा रहा है।
इस शिखर सम्मेलन से वैश्विक स्तर पर एक समावेशी, व्यावहारिक और प्रभाव-संचालित एआई सहयोग के द्वार खुलेंगे। वैश्विक मंच पर भारत की इससे न केवल साख बढ़ेगी बल्कि अन्य देशों के लिए अनुकरणीय होगा। भारत सरकार की यह पहल सराहनीय है । AI की ग्लोबल कांफ्रेंस सबके लिए बड़ा अवसर भी है। भारत AI और इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट का लोकहित, देशहित, डिजिटल लोकतंत्र - डिजिटल डेमोक्रेसी, भारतीय डिजिटल मेधा के हित में कैसे इस्तेमाल करेगी यह आने वाला समय बताएगा।
( लेखक : डिजिटल मीडिया से पिछले 25 साल से जुड़े हैं )
मेरे बारे में
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पत्रकारिता - साधनों की शुध्दता के साथ लोकहित के उद्देश्य से सत्य उध्दाटित करने की रचनात्मक प्रक्रिया।
पत्रकार - एक चिंतक, योध्दा और सत्य का रक्षक।
सफलता - उत्कृष्ट होना और बने रहना सफल होने से ज्यादा चुनौतीपूर्ण है।
जन्म - 10 जून 1969 को बुंदेलखण्ड के झांसी शहर के स्व. श्री एम.एल. नगेले एवं श्रीमती शकुन नगेले के मध्यम परिवार में। शिक्षा - हिन्दी में स्नातक,
कैशोर्य की देहरी लांघते ही मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में पदार्पण।
जीवन यात्रा - रचनात्मक एवं राजनीतिक लेखन की ओर छात्रावस्था से ही रूझान रहा।
म.प्र. के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री सीडी संस्करण प्रथम एवं द्वितीय। सामाजिक-आर्थिक विषयों पर लेखन की दृष्टि से भारत सरकार ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह, केरल, तामिलनाडू जैसे राज्यों का अध्ययन भ्रमण कराया। इस यात्रा तथा मधयप्रदेश के महाकौशल क्षेत्र की सामाजिक आर्थिक अधोसंरचना का अधययन भ्रमण के दौरान सृजित हुई।
''माया'' राष्ट्रीय राजनैतिक पत्रिका में कुछ मापदण्ड निर्धारित कर मध्यप्रदेश के टाँप टेन एम.एल.ए. चयनित कर विधायकों पर केन्द्रित विशेषांक का सृजन। अब तक के मप्र विधानसभा के अध्यक्षों पर केन्द्रित सीडी का सृजन। सिंहास्थ 2004 पर केन्द्रित सीडी का सृजन। आईटी स्टेटस इन मध्यप्रदेश, आईटी फॉर डव्लेपमेंट, ई@मध्यप्रदेश विशेषांक का संपादन। मध्यप्रदेश में ई-सेवाएं एक नजर में। प्रवासी भारतीय दिवस 7-9 जनवरी, 2008 पर विशेषांक का संपादन।
लगभग दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय - इंटरनेट मीडिया एक नये स्वरूप में सामने आ रहा है। हिन्दी भाषी राज्यों में इंटरनेट पत्रकारिता का शैशवकाल है। भारत में इंटरनेट पत्रकारिता की संभावनाओं को देखते हुए http://www.mppost.org/ पर मध्यप्रदेश का पहला इंटरनेट हिन्दी समाचार पत्र एक जनवरी 2005 से शुरू किया।
चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, छत्तीसगढ़, केरल, महाराष्ट्र, उड़ीसा, असाम, पंजाब, तमिलनाडू, कर्नाटक, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल और गुजरात की आई.टी. नीतियों का अध्ययन, इंटरनेट पत्रकारिता से जुड़े लोगों, संस्थाओं प्रमुख, आई.टी. कंपनियों, विशेषज्ञों से सतत् संवाद। इंटरनेट पर आयोजित अंर्तराष्ट्रीय सेमीनार डब्ल्यू3सी में मध्यप्रदेश की ओर से प्रतिनिधित्व किया। साऊथ एषिया की सबसे बड़ी आई.टी. प्रर्दशनी एवं सेमीनार जीटेक्स इंडिया में भाग लिया। साऊथ एशिया के सबसे बड़े संचार एवं आई.टी. इवेंट कर्न्वजेंस इंडिया- 2006 में शामिल हुए। प्रवासी भारतीय दिवस में विशेष रूप से मीडिया प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया। म.प्र. सरकार द्वारा आयोजित आई.टी. समिट में हिस्सा लिया।
पत्रकारिता -
बीबीसी- वेबदुनिया द्वारा आयोजित ऑन लाइन पत्रकारिता कार्यशाला में भागीदारी। राष्ट्रीय सहारा, दिल्ली, अक्षर भारत, दिल्ली, राज्य की नई दुनिया, भोपाल जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में संवाददाता के रूप में कार्य। म.प्र. के प्रमुख दैनिक नवीन दुनिया जबलपुर के भोपाल ब्यूरो प्रमुख के रूप में संबध्द रहे। महाकौशल के प्रमुख सांध्य दैनिक सीटाइम्स के भोपाल ब्यूरो प्रमुख के रूप में संबध्द रहे। राष्ट्रीय राजनैतिक पत्रिका ''माया'' के मध्यप्रदेश विशेष संवाददाता के रूप में संबध्द रहे। दूरदर्शन, आकाशवाणी के लिये संवाद लेखन, विधानसभा कार्यवाही की समीक्षात्मक रिर्पोट लेखन। भोपाल दूरदर्शन से प्रसारित लाइव फोन इन कार्यक्रम शुभ-शाम में 17 अगस्त 2009 को विषय विशेषज्ञ के रूप में वेब जर्नलिज्म में भविष्य का प्रसारण।
संप्रति -
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